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बैंकों को उधार देने की समय सीमा का विस्तार

Tue 30 Jun, 2020

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लॉकडाउन के कारण उत्पन्न प्रतिकूल आर्थिक स्थितियों के ध्यान में रखते हुए बैंकों की नकदी की समस्या को दूर करने के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक से बैंकों के कर्ज लेने की सीमा की सुविधा को 30 सितंबर, 2020 तक विस्तारित कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि

  • इससे पहले 27 मार्च, 2020 को सीआरआर का न्यूनतम दैनिक रखरखाव निर्धारित सीआरआर के 90% से घटाकर 80% कर दिया गया था। उपरोक्त सुविधा 26 जून 2020 तक उपलब्ध थी।
  • भारत में अनुसूचित बैंक, वह बैंक हैं जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अधिनियम, 1934 की द्वितीय अनुसूची में शामिल किया गया है। रिजर्व बैंक इस अनुसूची में केवल उन बैंकों को ही शामिल करता है जो, उपर्युक्त अधिनियम की धारा 42(6) (क) के मानदंडों का अक्षरक्ष पालन करते हों।
  • वाणिज्यक या व्यपारिक बैंक वह वित्तीय संस्था है जो लोगो के रूपये को अपने पास जमा के रूप में स्वीकार करती है और उनको उपभोग या निवेश के लिए उधार देती है इसके अतिरिक्त आजकल वाणिज्यक बैंक (Commercial Bank) और भी कई कार्य करते है जैसे साख निर्माण, रूपये को एक स्थान से दुसरे स्थान पर हस्तांतरित करना, एजेंसी कार्य तथा सामान्य सेवाए|

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अस्थायी उपाय के रूप में ‘सीमांत स्थायी सुविधा’ (Marginal Standing Facility- MSF) के तहत अधिसूचित बैंकों के लिये कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाया गया है। 27 मार्च, 2020 से इस निर्णय को क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पहले इस छूट की समयावधि 30 जून, 2020 तक थी जिसे अब बढ़ाकर 30 सितंबर, 2020 तक कर दिया गया है।
  • सीमांत स्थायी सुविधा के तहत बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक से अपनी शुद्ध मांग (Net Demand) तथा समय देयता (Time Liabilities) का 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक उधार ले सकेंगे।

सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility)

  • भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2011-12 में मौद्रिक नीति में सुधार करते हुए ‘सीमांत स्थायी सुविधा योजना’ की शुरूआत की गई थी।
  • सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) के तहत बैंक अंतर-बैंक तरलता (Inter-Bank Liquidity) की कमी को पूरा करने के लिये आपातकालीन स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं।

नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio)

  • देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत प्रत्येक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना ही होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) या नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) कहा जाता है।