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45वां जी-7 शिखर सम्मेलन

Fri 30 Aug, 2019

45वां जी-7 शिखर सम्मेलन फ्रांस के बिरिट्ज शहर में में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन का एजेंडा आय और लैंगिक असमानता से लड़ने और जैव विविधता की रक्षा पर केंद्रित है। शिखर सम्मेलन के अंत में कोई संयुक्त विज्ञप्ति जारी नहीं की गई थी। भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के विशेष सत्र में विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में भाग लिया।

समापन विज्ञप्ति

  • विश्व व्यापार संगठन को बौद्धिक संपदा संरक्षण से सम्बंधित विवादों को शीघ्रता से निपटाना चाहिए और अनुचित व्यापार प्रथाओं को समाप्त करना चाहिए।
  • जी-7 देश ओईसीडी के बनाए गये नियमों  के अधीन नियमाकीय बाधाओं को सुगम बनाने एवं अंतर्राष्ट्रीय कराधान के आधुनिकरण के लिए 2020 में समझौते पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए ईरान को परमाणु हथियारों की प्राप्ति को रोकना।
  • केवल राजनीतिक समाधान ही लीबिया की स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।
  • फ्रांस और जर्मनी नॉरमैंडी प्रारूप पर शिखर सम्मेलन का आयोजन करेंगे।
  • जी-7 ने हांगकांग पर  चीन-ब्रिटिश समझौते1984 के अस्तित्व और महत्व की पुष्टि की है और हिंसा रोकने का आह्वान किया किया है।

जी-7

  • 1975 में स्थापित जी-7 कथित तौर विश्व की सात सबसे बड़ी विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका शामिल हैं। इसे ग्रुप ऑफ़ सेवन भी कहते हैं।
  • समूह खुद को "कम्यूनिटी ऑफ़ वैल्यूज" यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है। स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और क़ानून का शासन और समृद्धि और सतत विकास, इसके प्रमुख सिद्धांत हैं।
  • चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी वो इस समूह का हिस्सा नहीं है, क्यूंकि चीन में विश्व की सर्वाधिक आबादी निवास करती हैं और प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले बहुत कम है।