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उत्सर्जन कारोबार योजना

Wed 25 Sep, 2019

हाल ही में गुजरात सरकार ने सूरत जिले में वायु प्रदूषण को कम करने और उत्सर्जन को सीमित करने वाली औद्योगिक इकाइयों की अनुपालन की लागत को कम करने के लिए उत्सर्जन कारोबार योजना (Emissions Trading Scheme) शुरू की है। यह विश्व में कणकिय पदार्थों (Particulate Matter) के उत्सर्जन के व्यापार की व्यवस्था करने की प्रथम योजना है।

पृष्ठभूमि

  • वर्तमान में प्रदूषण नियंत्रण हेतु व्यापार तंत्र दुनियाविश्व के विभिन्न भागों में प्रचलित है परन्तु उनमें से कोई भी कण उत्सर्जन के लिए नहीं है।
  • उदाहरण के लिए  क्योटो प्रोटोकॉल के तहत कार्बन विकास तंत्र, कार्बन क्रेडिट ’में व्यापार की अनुमति है तथा  यूरोपीय संघ की ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए उत्सर्जन व्यापार प्रणाली है।
  • भारत ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा संचालित एक योजना भी शुरू की है जो ऊर्जा इकाइयों में व्यापार को सक्षम करती है।

उत्सर्जन व्यापार योजना की मुख्य विशेषताएं

  • यह एक ऐसी बाजार व्यवस्था होगी जहां सरकार (गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) कणकिय पदार्थों के उत्सर्जन की एक सीमा निर्धारित करती है और उद्योगों को इस सीमा से नीचे परमिट खरीदने और बेचने की अनुमति देती है।
  • इसके तहत औद्योगिक इकाइयां नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDS) पर किसी भी अन्य कमोडिटी की तरह, एक दूसरे के साथ परमिट का व्यापार कर सकते हैं।
  • इसके तहत कोई कंपनी अगर निर्धारित सीमा से अपना उत्सर्जन घटाती है तो वह अपना ‘उत्सर्जन परमिट’ बेच सकती है, जो प्रदूषण घटाने की लागत को भी कम करेगा।
  • इसके तहत प्रदूषक तत्वों के उत्सर्जन में कटौती करने पर प्रोत्साहन दिया जाएगा तथा कारगर अनुपालन के लिये औद्योगिक इकाइयों को सतत उत्सर्जन निगरानी तंत्र से जोड़ा जाएगा।
  • विभिन्न उद्योग इस कैप के तहत ट्रेडिंग परमिट (किलोग्राम में) द्वारा कण मामले को कम करने की क्षमता खरीद और बेच सकते हैं। इस कारण से, ईटीएस को कैप-एंड-ट्रेड मार्केट भी कहा जाता है।

उत्सर्जन व्यापार योजना की रूपरेखा

 

क्योटो प्रोटोकॉल

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संधि है, जिसे 1997 में जापान के क्योटो में संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में  अपनाया गया था,  जिसका उद्देश्य कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन और वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की उपस्थिति को कम करना था।
  • इसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहॉउस गैस का घनत्व ऐसे मात्रा पर स्थिर रखना जिससे मनुष्य जीवन द्वारा जलवायु में कोई हानिकारक रुकावट उत्पन्न न हो।

कार्बन क्रेडिट

  • कार्बन क्रेडिट अंतर्राष्ट्रीय उद्योग में कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण की योजना है।
  • क्योटो प्रोटोकॉल में प्रदूषण कम करने के दो तरीके सुझाए गए थे, इस कमी को कार्बन क्रेडिट की यूनिट में जाता है।
  • कार्बन क्रेडिट सही मायने में किसी देश द्वारा किये गये कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने का प्रयास है जिसे प्रोत्साहित करने के लिए मुद्रा से जोड़ दिया गया है।
  • कार्बन डाइआक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए क्योटो संधि में एक तरीक़ा सुझाया गया है जिसे कार्बन ट्रेडिंग कहते हैं अर्थात कार्बन ट्रेडिंग से सीधा मतलब है कार्बन डाइऑक्साइड का व्यापार।