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समसामयिकी

Mon 28 Sep, 2020

फेम इंडिया स्कीम चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और चंडीगढ़ राज्यों में 670 इलेक्ट्रिक बसें तथा मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और पोर्ट ब्लेयर के 241 चार्जिंग स्टेशन फेम इंडिया योजना के द्वितीय चरण के तहत स्वीकृत किए हैं।

फेम इंडिया योजना क्या है?

  • फेम इंडिया (फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) योजना देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोत्साहन योजना है। इस योजना का अंतिम उद्देश्य विद्युत की गतिशीलता को बढ़ावा देना है तथा यह योजना इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन को बढ़ाने और इलेक्ट्रिक परिवहन बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन राशि देती है।
  • मूल रूप से, इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माताओं और विनिर्माण प्रदाताओं को सब्सिडी के रूप में प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • इसे 2015 में भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था।
  • यह योजना दो चरणों में संचालित होती है-
    1. प्रथन चरण: 2015 में प्रारंभ और 31 मार्च, 2019 को संपन्न हुई।
    2. द्वितीय चरण: 1 अप्रैल 2019 से प्रारंभ किया तथा 31 मार्च, 2022 तक संपन्न किया जाएगा।

फेम के क्षेत्रों पर ध्यान दें-

  • इस योजना में माइल्ड हाइब्रिड, स्ट्रांग हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन जैसी इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीक शामिल हैं। फेम 4 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है अर्थात् प्रौद्योगिकी विकास, डिमांड क्रिएशन, पायलट प्रोजेक्ट्स और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर।

फेम-II

  • द्वितीय चरण प्रथम चरण का विस्तारित संस्करण है। फेम इंडिया द्वितीय चरण में 1 अप्रैल 2019 से 2022 तक तीन वर्षों की अवधि में कुल 10000 करोड़ रुपये का परिव्यय है।
  • 2019-20 के लिए योजना का आवंटन 1,500 करोड़ रुपये; 2020-21 में 5,000 करोड़ रुपये और 2021-22 में 3,500 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
  • फेम -II ईवी तकनीक का उपयोग करके बसों; इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड और मजबूत हाइब्रिड चौपहिया गाड़ी; ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक दोपहिया सहित इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन को सम्मलित किया जाएगा।
  • समग्र नियंत्रण, योजना के अनुमोदन और कार्यान्वयन के लिए, एक अंतर-मंत्रालयीय अधिकार प्राप्त समिति - ‘परियोजना क्रियान्वयन और स्वीकृति समिति" (PISC) जिसका नेतृत्व भारी उद्योग सचिव करते हैं, का गठन किया जाएगा।