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अधिशेष हस्तांतरण को मंजूरी

Thu 29 Aug, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (के केंद्रीय बोर्ड ने पूंजी हस्तांतरण पर पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों सहमती देते हुए केंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है।

पृष्ठभूमि

  • इस समिति का गठन आरबीआई के मौजूदा आर्थिक पूंजी के नियम (ईसीएफ) की समीक्षा के लिए सरकार के साथ विचार विमर्श कर रिजर्व बैंक ने समिति का गठन किया था।
  • इस समिति में पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन, वित्त सचिव राजीव कुमार, केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथन और सेंट्रल बोर्ड के दो सदस्य भरत दोशी और सुधीर मनकड़ भी शामिल हैं।

प्रमुख सिफारिशें

  • आर्थिक पूंजी के दो घटकों (इक्विटी और पुनर्मूल्यांकन संतुलन) के बीच एक स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
  • रिजर्व बैंक की आर्थिक पूंजी व्यवस्था की प्रत्येक पांच साल में समीक्षा की जानी चाहिए इससे सरकार को अधिशेष हस्तांतरण के मामले में अधिक स्थायित्व आएगा।
  • आरबीआई के पूंजी ढांचे की हर पांच साल में समीक्षा की जानी चाहिए और भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) के वित्त वर्ष को 2020-21 से मौजूदा जुलाई-जून से बदलकर देश के वित्त वर्ष के मुताबिक यानी अप्रैल से मार्च किया जाना चाहिए।
  • जोखिमों/हानि को पूरा करने के लिए आरबीआई की आकस्मिक निधि बैलेंस शीट के 6.5-5.5% के दायरे में होनी चाहिए।

लाभ

  • आरबीआई की ओर से अतिरिक्त ट्रांसफर किए जाने से केंद्र सरकार के पास अतिरिक्त पैसा आएगा। इससे सरकार को सार्वजनिक लोन चुकाने और बैंकों में पूंजी डालने में सहायता मिलेगी।