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मध्य-पूर्व शांति योजना

Fri 31 Jan, 2020

हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइटहाउस में 'Peace to Prosperity: A Vision to Improve the Lives of the Palestinian and Israeli People' नामक से मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अपनी बहुप्रतीक्षित योजना की घोषणा की है। इस शांति योजना को संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति सलाहकार ट्रम्प के जेरेड कुशनर के नेतृत्व में एक वरिष्ठ टीम ने लिखा है।

पृष्ठभूमि

  • वेस्ट बैंक इज़राइल और जॉर्डन के मध्य अवस्थित है। इसका एक सबसे बड़ा शहर ‘रामल्लाह’ (Ramallah) है, जो कि फिलिस्तीन की वास्तविक प्रशासनिक राजधानी है। इज़राइल ने वर्ष 1967 के युद्ध में इस पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।
  • फिलिस्तीनियों ने लंबे समय से वेस्ट बैंक में एक स्वतंत्र, संप्रभु राज्य की स्थापना करने की मांग की है, जिसमें पूर्वी यरूशलेम, और गाजा पट्टी शामिल हैं, जो 1967 के छह दिवसीय युद्ध के दौरान इजरायल द्वारा कब्जा कर लिया गया था।
  • गाजा पट्टी इज़राइल और मिस्र के मध्य स्थित है। इज़राइल ने वर्ष 1967 में गाजा पट्टी का अधिग्रहण किया था, किंतु गाजा शहर के अधिकांश क्षेत्रों के नियंत्रण तथा इनके प्रतिदिन के प्रशासन पर नियंत्रण का निर्णय ओस्लो समझौते के दौरान किया गया था। वर्ष 2005 में इज़राइल ने इस क्षेत्र से यहूदी बस्तियों को हटा दिया यद्यपि वह अभी भी इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय पहुँच को नियंत्रित करता है।
  • 1990 के दशक में ओस्लो समझौता इज़राइल और फिलीस्तीन के बीच हुए समझौतों की शृंखला है। वर्ष 1993 में प्रथम ओस्लो समझौते के अनुसार इज़राइल और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन ने एक-दूसरे को आधिकारिक मान्यता देने तथा हिंसक गतिविधियों को त्यागने पर सहमति प्रकट की। ओस्लो समझौते के तहत एक फिलिस्तीनी प्राधिकरण की भी स्थापना की गई थी। हालाँकि इस प्राधिकरण को गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक के भागों में सीमित स्वायत्तता ही प्राप्त हुई थी।
  • इसके पश्चात् वर्ष 1995 में दूसरा ओस्लो समझौता किया गया जिसमें वेस्ट बैंक के 6 शहरों और लगभग 450 कस्बों से इज़राइली सैनिकों की पूर्ण वापसी का प्रावधान शामिल था।

प्रमुख बिंदु 

  • इस योजना के अनुसार येरुशलम को विभाजित नहीं किया जाएगा और यह ‘इज़राइल की संप्रभु राजधानी’ होगी।
  • फ़िलिस्तीन अपनी राजधानी पूर्वी यरुशलम की जगह यरुशलम की म्यूनिसिपल सीमा से बाहर एक गाँव में सीमित ‘अबू दिस’ अथवा ‘अल कुद्स’ में अपनी राजधानी स्थापित कर सकता है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अल कुद्स के इर्द गिर्द के कुछ इलाक़ों को भी नई राजधानी में शामिल किया जा सकता है।
  • ‘येरुशलम की पवित्र धरती व्यवस्था इज़राइल के अधीन होगी’ और ‘इसे सभी धर्मों के शांतिपूर्ण उपासकों एवं पर्यटकों के लिये खुला रखा जाएगा’।
  • यदि फिलीस्तीन इस योजना को स्वीकार करता है तो अमेरिका वहाँ आगामी 10 वर्षों में 50 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा, जिसे वहाँ के निजी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार हो सकेगा, इससे फिलीस्तीन के नागरिकों के जीवन स्तर की गुणवत्ता भी सुधरेगी।
  • इसमें वेस्ट बैंक और गाजा के बीच "उच्च गति परिवहन लिंक" सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण, निजी क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देना, शिक्षा का उन्नयन और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और फिलिस्तीनी जीवन की समग्र गुणवत्ता शामिल है।
  • जॉर्डन घाटी पर इज़राइल की संप्रभुता बनी रहेगी।

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष

  • इज़राइल और फिलिस्तीन के मध्य संघर्ष की शुरुआत वर्ष 1917 में ब्रिटिश विदेश सचिव आर्थर जेम्स बल्फौर ने ‘बल्फौर घोषणा’ (Balfour Declaration) के तहत फिलिस्तीन में यहूदीयों ‘राष्ट्रीय घर’  के निर्माण के लिये ब्रिटेन के आधिकारिक समर्थन के साथ हुयी थी।
  • वर्ष 1967 में प्रसिद्ध ‘सिक्स डे वॉर’ (Six-Day War) हुआ, जिसमें इज़राइली सेना ने गोलन हाइट्स, वेस्ट बैंक तथा पूर्वी येरुशलम को भी अपने अधिकार क्षेत्र में कर लिया।
  • वर्ष 1987 में मुस्लिम भाईचारे की मांग हेतु फिलिस्तीन में ‘हमास’ नाम से एक हिंसक संगठन का गठन किया गया जिसका उद्देश्य हिंसक धार्मिक युद्ध के माध्यम से फिलिस्तीन के प्रत्येक भाग पर मुस्लिम धर्म का विस्तार करना था।
  • समय के साथ वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी के अधिगृहीत क्षेत्रों में तनाव व्याप्त हो गया जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1987 में प्रथम इंतिफादा (Intifida) अथवा फिलिस्तीन विद्रोह हुआ, जो कि फिलिस्तीनी सैनिकों और इज़राइली सेना के मध्य एक छोटे युद्ध में परिवर्तित हो गया।