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फॉरेस्ट-प्लस 2.0

Sat 28 Sep, 2019

भारत में टिकाऊ वन प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) और भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने  आधिकारिक तौर पर फॉरेस्ट-प्लस 2.0 (Forest-PLUS 2.0) कार्यक्रम शुरू  कर दिया है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2012 में फॉरेस्ट-प्लस के प्रथम संस्करण के अंतर्गत टिकाऊ वन परिदृश्य प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सिक्किम, रामपुर, शिवमोग्गा और होशंगाबाद के चार पायलट प्रोजेक्ट शुरू किये गए थे।
  • इसका उद्देश्य ‘निर्वनीकरण एवं वन निम्नीकरण से होने वाले उत्सर्जन में कटौती’ (REDD +) में भाग लेने हेतु भारत की क्षमता को विकसित करना था।
  • इसी कार्यक्रम के अंतर्गत सिक्किम में जैव-ब्रिकेट्स (Bio-Briquettes) का संवर्द्धन, रामपुर में सौर ताप प्रणाली और होशंगाबाद में कृषि- वानिकी मॉडल का विकास किय गया।
  • बायो-ब्रिकेट्स विकासशील देशों में प्रयोग किया जाने वाले कोयला और चारकोल का जैव-ईंधन विकल्प हैं।

फॉरेस्ट-प्लस 2.0

  • यह वन परिवेश प्रबंधन द्वारा पारितंत्र प्रबंधन और पारिस्थितिकीय को संवर्द्धित करने के लिए उपकरणों और तकनीकों के विकास करने पर आधारित  है।
  • इसे अमेरिका की कंपनी टेट्रा टेक और नई दिल्ली स्थित IORA इकोलॉजिकल सॉल्यूशंस द्वारा क्रियांवान्यित किया जायेगा।
  • इसके दुसरे संस्करण में 1,20,000 हेक्टेयर भूमि का बेहतर प्रबंधन उद्देश्य के अंतर्गत गया (बिहार), तिरुवनंतपुरम (केरल) और मेडक (तेलंगाना)को शामिल किया गया है।

REDD+( Reducing emissions from deforestation and forest degradation)

  • REDD+ कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2005 में विकासशील देशों में वन प्रबंधन के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिये शुरू किया गया था।