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दो असमान-द्रव्यमान ब्लैक होलों का विलय

Tue 28 Apr, 2020

हाल ही में लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव लेबोरेटरी (LIGO) ने असमान द्रव्यमान के दो ब्लैक होल के विलय का पता लगाया है और इस घटना को GW190412 नाम दिया गया है। पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के पांच साल बाद यह ज्ञात हुआ है। वास्तविक विलय पृथ्वी से 2.5 बिलियन प्रकाश वर्ष दूर हुआ।

पृष्ठभूमि

  • काफी समय से वैज्ञानिक ब्लैक होल के विलय के अध्ययन करने का प्रयास कर रहे थे, वे गुरुत्वाकर्षण तरंगों के माध्यम से इस घटना को समझने की कोशिश कर रहे थे। वैज्ञानिकों के एक समूह ने जब पिछले साल ब्लैक होल विलय की घटना के आंकड़ों का अध्ययन किया तो उन्होंने अभी तक मिले संकेतों से ये संकेत अलग ही थे।

प्रमुख बिंदु 

  • GW190412 नामक इस घटना का पता लगभग एक वर्ष पहले पता चला था और इन शक्तिशाली डिटेक्टरों द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंग संकेतों के पहले कभी पता लगाने के लगभग पांच साल बाद है।
  • अब तक यह देखा जाता था कि जो ब्लैक होल विलय कर रहे हैं उनका आकार समान होता था, लेकिन  इस बार पाया गया कि जो ब्लैक होल विलय कर रहे हैं उनमें से एक दूसरे से तीन चार गुना बड़ा था।
  • संकेतों के विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि छोटा ब्लैकहोल हमारे सूर्य से 8 गुना बड़ा था जबकि बड़ा ब्लैकहोल हमारे सूर्य से तीस गुना ज्यादा बड़ा था। वास्तविक विलय 2.5 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर हुआ था।

ब्लैक होल (Black hole)

  • कृष्ण विवर (श्याम विवर) अर्थात ब्लैक होल अत्यधिक घनत्व तथा द्रव्यमान वाले ऐसें पिंड होते हैं, जो आकार में बहुत छोटे होते हैं। इसके अंदर गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि उसके चंगुल से प्रकाश की किरणों निकलना भी असंभव होता हैं। चूंकि यह प्रकाश की किरणों को अवशोषित कर लेता है, इसीलिए यह अदृश्य बना रहता है।
  • 1916 में, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सापेक्षता के अपने सामान्य सिद्धांत में पहले ब्लैक होल की भविष्यवाणी की थी। लेकिन 'ब्लैक होल' शब्द 1967 में अमेरिकी खगोलशास्त्री जॉन व्हीलर द्वारा गढ़ा गया था।