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अटल भूजल योजना

Thu 26 Dec, 2019

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर अटल भूजल योजना (अटल जल) आरम्भ किया एवं और जल जीवन मिशन के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए।

पृष्ठभूमि

  • भारत में विश्व की 16% आबादी निवास करती है, परन्तु जल संसाधन केवल 4% है।
  • उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश के 17.87 करोड़ ग्रामीण घरों में से, लगभग 14.6 करोड़ में जो 81.67 प्रतिशत हैं, उनमें अभी भी घरेलू पानी के नल कनेक्शन नहीं हैं।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13.08.2019 को 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी)  उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन (जेजेएम) को मंजूरी प्रदान की थी।

मुख्य बिंदु

  • अटल जल की रूपरेखा सहभागी भूजल प्रबंधन के लिए संस्थागत संरचना को सुदृढ़ करने तथा सात राज्यों अर्थात गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में टिकाऊ भूजल संसाधन प्रबंधन के लिए समुदाय स्तर पर व्यवहारगत बदलाव लाने के मुख्य उद्देश्य के साथ बनाई गई है।
  • 5 वर्षों (2020-21 से 2024-25) की अवधि में क्रियान्वित किए जाने वाले 6,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय में से, 50 प्रतिशत विश्व बैंक ऋण के रूप में होगा और उनका पुनर्भुगतान केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • शेष 50 प्रतिशत का भुगतान नियमित बजटीय समर्थन से केन्द्रीय सहायता द्वारा किया जाएगा। विश्व बैंक ऋण का समस्त घटक और केन्द्रीय सहायता राज्यों को अनुदान के रूप में दी जाएगी।
  • जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित संस्थागत व्यवस्था प्रस्तावित की गई है:
  1. केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन;
  2. राज्य स्तर पर राज्य जल और स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम);
  3. जिला स्तर पर जिला जल और स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम); तथा
  4. गाँव स्तर पर ग्राम पंचायत और / या इसकी उप-समितियाँ अर्थात् जल ग्राम स्वच्छता कमेटी (वीडब्ल्यूएससी) / पानी समिति।
  • भारत के संविधान के 73वें संशोधन की भावना को अपनाते हुए, ग्राम पंचायतें या इसकी उप-समितियाँ, गाँव के बुनियादी ढाँचे की योजना, डिजाइन, निष्पादन, संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

जल जीवन मिशन

  • जल जीवन मिशन का उद्देश्य पर्याप्त मात्रा में यानी नियमित आधार पर प्रति व्यक्ति 55 लीटर प्रति दिन (एलपीसीडी) निर्धारित गुणवत्ता का हो यानी आईएस के बीआईएस मानक 10500 का पीने का पानी उपलब्ध कराना है।
  • विभिन्न योजनाओं के तहत उपलब्ध निधियों का उपयोग करने के अलावा, सरकार इस प्रयोजन के लिए क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (CAMPA) के तहत उपलब्ध अतिरिक्त निधियों का उपयोग करने की संभावना भी तलाशेगी।