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आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए तरलता जोखिम प्रबंधन ढांचे का ड्राफ्ट जारी किया

Mon 27 May, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और कोर निवेश कंपनियों (सीआईसी) के लिए तरलता जोखिम प्रबंधन ढांचे पर मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। आरबीआई ने 14 जून तक ड्राफ्ट पर हितधारकों की टिप्पणियों को आमंत्रित किया है।

पृष्ठभूमि

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी IL & FS संकट के कारण वर्तमान में बैंक गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र को ऋण देने में अनिच्छुक हैं। बाजार में इस बात की आशंका बढ़ रही है कि एनबीएफसी दिवालिया हो सकते हैं ।
  • डीएचएफएल और इंडियाबुल्स फाइनेंस जैसी बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां गंभीर तरलता संकट से जूझ रहे है और अधिक से अधिक वाणिज्यिक पत्रों (सीपी) पर निर्भर हैं । वाणिज्यिक पत्रों (सीपी) एक ऐसा ऋण साधन है जो कंपनियों द्वारा 1 वर्ष तक की अवधि के लिए धन जुटाने के लिए जारी किया जाता है।
  • कुछ दिन पहले आरबीआई ने बैंकों और एनबीएफसी सहित वित्तीय संस्थानों की देखरेख और विनियमन के लिए विशेष कैडर बनाने की भी घोषणा की।

ड्राफ्ट की आवश्यकता

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में गंभीर तरलता समस्या का समाधान ।
  • IL & FS जैसी ऋण संकट की पुनरावित्ति को रोकना ।
  • एनबीएफसी क्षेत्र के बेहतर परिचालन को बढ़ावा देना ।

ड्राफ्ट के मुख्य प्रावधान

तरलता कवरेज अनुपात (LCR)

  • आरबीआई बैंकों की तर्ज पर एनबीएफसी में  भी तरलता कवरेज अनुपात (LCR) शुरू करने का प्रस्ताव रखा है जो चरणबद्ध तरीके से 5000 करोड़ रुपये और उससे अधिक की परिसंपत्ति आकार पर लागू होगा। एलसीआर गैर-वित्तीय वित्तीय मध्यस्थों पर भी लागू होगा जो पारंपरिक वाणिज्यिक बैंकों के समान सेवाएं प्रदान करते हैं लेकिन नियामक निगरानी के अधीन नहीं हैं।
  • क्रियान्वयन 60% की न्यूनतम एलसीआर के साथ अप्रैल 2020 से शुरू किया जाएगा जो अगले 4 वर्षों में अप्रैल 2024 तक समान चरणों में उत्तरोत्तर वृद्धि करते हुए 100% के आवश्यक स्तर तक पूर्ण होगी।
  • एनबीएफसी पर्याप्त मात्रा में ऋण मुक्त उच्च गुणवत्ता वाली तरल आस्तियों (High Quality Liquid Assets -HQLA) को बनाए रखेगा जिसके तहत 30 दिन की समयावधि में तरलता की जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली तरल आस्तियों को नकदी में परिवर्तित किया जा सके।

उच्च गुणवत्ता वाली तरल आस्तियों (High Quality Liquid Assets -HQLA) :

  • इसका का अर्थ है ऐसी तरल संपत्तियाँ जो आसानी से बेची जा सकती हैं या तुरंत मूल्य के कम या बिना नुकसान के नकदी में परिवर्तित हो जाती हैं या तनाव परिदृश्यों की एक सीमा में धन प्राप्त करने के लिए संपार्श्विक के रूप में उपयोग की जाती हैं।

एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी (ALCO)

  • आरबीआई ने प्रभावी तरलता प्रबंधन और एनबीएफसी के लिए तरलता जोखिम की निगरानी के लिए विभिन्न उपकरणों को पेश करने का भी प्रस्ताव दिया है जिसमे से एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियोंके शीर्ष प्रबंधन से एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी का गठन भी शामिल है ।