• Mobile Menu
HOME BUY COURSES
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




‘ट्रेंड इन वर्ल्ड मिलिट्री एक्सपेंडेचर, 2019’

Wed 29 Apr, 2020

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’  द्वारा जारी ‘ट्रेंड इन वर्ल्ड मिलिट्री एक्सपेंडेचर, 2019’ (Trends in World Military Expenditure, 2019) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में विश्व में सर्वाधिक सैन्य खर्च वाले देशों की सूची में भारत तीसरे स्थान पर रहा है। वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 के कुल वैश्विक सैन्य खर्च में 3.8% की वृद्धि देखी गई है, जो वर्ष 2010 के बाद अब तक की सबसे अधिक वृद्धि है।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने फरवरी 2020 में संसद में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2020-21 के कुल 30,42,230 करोड़ रुपए बजट में से 3,37,553 करोड़ रुपए (रक्षा पेंशन को छोड़कर) सैन्य खर्च के रूप में आवंटित किये गए, इसके अतिरिक्त 1,33,825 करोड़ रुपए रक्षा पेंशन के रूप में आवंटित किये गए हैं।
  • भारत का वित्तीय वर्ष 2020-21 का कुल रक्षा बजट केंद्र सरकार के कुल खर्च (वित्तीय वर्ष 2020-21) का 15.49% है।   

मुख्य बिंदु

  • विगत दशकों में भारतीय सैन्य खर्च में लगातार वृद्धि हुई है, पिछले 30 वर्षों (वर्ष 1990-2019) के बीच भारतीय सैन्य खर्च में 259% की वृद्धि और वर्ष 2010-19 के बीच 37% की वृद्धि देखने को मिली है।
  • पिछले एक दशक में भारत की जीडीपी पर सैन्य खर्च का भार कम हुआ है (वर्ष 2010 में 2.7% जबकि वर्ष 2019 में मात्र 2.4%)। 
  • रिपोर्ट के अनुसार कुल वैश्विक व्यय का 62% हिस्सा क्रमशःअमेरिका, चीन, भारत, रूस और सऊदी अरब पांच देश द्वारा किया गया है।
  • चीन व भारत के अलावा, जापान (47.6 अरब डॉलर) और दक्षिण कोरिया (43.9 अरब डॉलर) एशिया में सबसे सर्वाधिक सैन्य खर्च करने वाले रहे थे। पाकिस्तान वर्ष 2019 में सैन्य खर्च के मामले में विश्व में 24वें स्थान पर रहा है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Stockholm International Peace Research Institute-SIPRI)

  • वर्ष 1966 में स्थापित SIPRI एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है जो युद्ध एवं संघर्ष, युद्धक सामग्रियों, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में शोध का कार्य करती है और नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं, मीडिया और इच्छुक लोगों को आँकड़ों का विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराती है।
  • इसका मुख्यालय स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में है और इसे विश्व के सर्वाधिक सम्मानित थिंक टैंकों की सूची में शामिल किया जाता है।