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बोडो समझौता 2020

Tue 28 Jan, 2020

हाल ही में असम के बोडो बहुल क्षेत्रों में स्थायी शांति लाने के उद्देश्य से नई दिल्ली में त्रिपक्षीय समझौते पर केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सम्झुते के अनुसार बोडो क्षेत्रों को राजनीतिक और आर्थिक लाभ प्रदान किय गया हैं लेकिन अलग राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी नहीं की गई है।

पृष्ठभूमि

  • यह पिछले 27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता है।1960 के दशक से ही बोडो अपने लिये बोडोलैंड नामक अलग राज्य की मांग करते आए हैं।
  • पहला समझौता वर्ष 1993 में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन के साथ हुआ था जिसके अनुसार सीमित राजनीतिक शक्तियों के साथ बोडोलैंड स्वायत्त परिषद की स्थापना की गयी।
  • दूसरा समझौता वर्ष 2003 में उग्रवादी समूह ‘बोडो लिबरेशन टाइगर्स’ के साथ हुआ था जिसके अनुसार  असम के चार जिलों-कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुड़ी को मिलाकर बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के गठन किय गया और इन चारों जिलों को बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला (बीटीएडी) कहा जाता है।

प्रमुख बिंदु

  • यह त्रिपक्षीय समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी, एबीएसयू के चार धड़ों के शीर्ष नेता, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येन्द्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने हस्ताक्षर किए।
  • इस समझौते के अनुसार 1500 से अधिक हथियारधारी सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होंगे|
  • समझौते में भारत सरकार और राज्य सरकार विशेष विकास पैकेज द्वारा 1500 करोड़ रु असम में बोडो क्षेत्रों के विकास के लिए विशिष्ट परियोजनाएं शुरू करेंगी। बोडो आंदोलन में मारे गए लोगों के प्रत्येक परिवार को 5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा |
  • समझौते से संविधान में छठी अनुसूची के अनुच्छेद 14 के तहत एक आयोग का गठन करने का प्रस्ताव है जो बहुसंख्यक गैर-आदिवासी आबादी कि बीटीएडी से सटे गांवों को शामिल करने और बहुसंख्यक आदिवासी आबादी की जांच करने का काम करेगा ।
  • असम सरकार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीटीएडी के बाहर बोडो गांवों के विकास के लिए बोडो-कचारी कल्याण परिषद की स्थापना करेगी। असम सरकार बोडो भाषा को राज्य में सहयोगी आधिकारिक भाषा के रूप में अधिसूचित करेगी और बोडो माध्यम स्कूलों के लिए एक अलग निदेशालय की स्थापना करेगी। 
  • समझौते के अनुसार बीटीएडी का नाम बदलकर अब बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) होगा और इसके पास अधिक कार्यकारी, प्रशासनिक, विधायी तथा वित्तीय शक्तियां होंगी।
  • बोडो बहुल गांवों को बीटीसी में शामिल करने और जहां बोडो की बहुलता नहीं है, उन्हें बीटीसी से बाहर निकालने के लिए आयोग का गठन होगा।
  • BTAD और संविधान की छठी अनुसूची के तहत उल्लिखित अन्य क्षेत्रों को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 [Citizenship (Amendment) Act, 2019] से छूट प्रदान की गई है।

बोडोलैंड आंदोलन

  • असम में इनकी ज़मीन पर अन्य समुदायों का आकर बसना और ज़मीन पर बढ़ता दबाव ही बोडो असंतोष की प्रमुख वज़ह है।
  • अलग राज्य के लिये बोडो आंदोलन 1980 के दशक के बाद हिंसक हो गया और तीन धड़ो में बँट गया। पहले समूह का नेतृत्व NDFB ने किया जो अपने लिये अलग राज्य चाहता था। दूसरा समूह बोडोलैंड टाइगर्स फोर्स है जिसने अधिक स्वायत्तता की मांग की। तीसरा समूह ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (All Bodo Students Union-ABSU) है जिसने मध्यम मार्ग की तलाश करते हुए राजनीतिक समाधान की मांग की।
  • वर्ष 1993 में ABSU के साथ पहली बार बोडो समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे जिसके फलस्वरूप सीमित राजनीतिक शक्तियों के साथ एक बोडोलैंड स्वायत्त परिषद का निर्माण हुआ।
  • बोडो अपने क्षेत्र की राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों पर वर्चस्व चाहते थे और यह उन्हें 2003 में तब मिला जब बोडो समूहों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा की राजनीति में आने पर सहमति जताई।