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RBI का COVID-19 आर्थिक राहत पैकेज

Mon 30 Mar, 2020

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने COVID-19 के कारण उत्पन्न होने वाली वित्तीय कठिनाइयों को कम करने के लिए आर्थिक राहत पैकेज पेश किया है। मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक 31 मार्च से तीन अप्रैल तक होनी थी परन्तु वर्तमान परिदृश्यों में पहली बार उसी बैठक निर्थारित द्विमासिक समयावधि से पूर्व हुयी है।

पृष्ठभूमि

  • इससे पूर्व 4 अक्टूबर 2019 को आरबीआई ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर रेपो रेट 5.15 प्रतिशत किया फिर फरवरी से अक्टूबर 2019 के बीच लगातार 5 बार में दरों में 135 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की है।

प्रमुख बिंदु

  • रेपो दर को 75 आधार अंकों से घटाकर 5.15 प्रतिशत से 4.4 प्रतिशत कर दिया गया है और बैंकों को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रिवर्स रेपो दर को 90 आधार अंकों घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • नकद आरक्षित अनुपात को 28 मार्च से एक वर्ष की अवधि हेतु 100 आधार अंक घटाकर 3 प्रतिशत निर्धारित किया गया है ताकि बैंकों के पास बाजार में नकदी का प्रवाह बाजार में हो सके। इस आपात स्थिति में केन्द्रीय बैंक 1.37 ट्रिलियन रुपये सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) के तहत उपलब्ध करायेगा।
  • रिटेल लोन की EMI भरने पर भी 3 महीने का मोरेटोरियम का प्रबंध किया है ताकि ऋण पर महीने तक ईएमआई टालने का विकल्प मिल सके।

मौद्रिक नीति समिति

  • उर्जित पटेल समिति की अनुशंषा पर केंद्र सरकार द्वारा 27 जून 2016 को धारा 45ZB के तहत गठित मौद्रिक नीति समिति (मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतिगत ब्याज दर निर्धारित करती है।
  • एमपीसी में छः सदस्यों का एक पैनल है जिसमें तीन सदस्य आरबीआई से होते है तथा तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा चयनित होते हैं।