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विरोध करना एक मौलिक अधिकार

Fri 31 Jul, 2020

हाल ही में 'संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति' ने शांतिपूर्ण ढंग से, ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से विरोध करने को मनुष्य के एक ‘मौलिक मानवीय अधिकार’ के रूप में पुष्टि की है। 18 स्वतंत्र विशेषज्ञों से बनी इस समिति को 'नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्‍ट्रीय नियम' (The International Covenant on Civil and Political Rights - ICCPR) के अनुच्छेद 21 के तहत शांतिपूर्ण विधानसभा के अधिकार की गारंटी को लागू करने के उपाय सुझाने हेतु गठित किया था।

पृष्ठभूमि

  • यह प्रतिपुष्टि राजनीतिक अधिकारों और नस्लीय न्याय जैसे मुद्दों पर बढ़ते प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया है। भारत 'नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्‍ट्रीय नियम' पर हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) सभी नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 19(1)(b) में सभी नागरिकों को बिना हथियार के शांतिपूर्ण रूप से एकत्रित होने का मौलिक अधिकार प्रदान है। इस प्रकार विरोध के अधिकार को संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • संविधान के अनुच्छेद- 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत पूर्वोक्त अधिकार अपने दायरे में अछूता और असीमित नहीं हैं तथा इन पर भी युक्तियुक्त निर्बंधन लगाए गए हैं।

प्रमुख बिंदु 

  • नवीन व्याख्या के अनुसार हर्ष प्रकटीकरण या असंतुष्टि प्रदर्शित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक या निजी स्थानों पर, घर के अंदर या बाहर या फिर ऑनलाइन रूप से एकत्रित होना मानव का एक मौलिक अधिकार है। बच्चों, विदेशी नागरिकों, महिलाओं, प्रवासी श्रमिकों, शरण चाहने वालों और शरणार्थियों सहित प्रत्येक व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने के अधिकार का उपयोग कर सकता है। 
  • प्रदर्शनकारियों को अपना चेहरा ढंकने के लिए मास्क या हुड पहनने का अधिकार है और प्रतिभागियों को परेशान करने या डराने के लिए सरकारों को व्यक्तिगत डेटा एकत्र नहीं करना चाहिए।
  • सरकारें "सार्वजनिक आदेश या सार्वजनिक सुरक्षा, या संभावित हिंसा के अनिर्दिष्ट जोखिम" के संदर्भ में विरोध प्रदर्शनों को प्रतिबंधित नहीं कर सकती थीं और सरकारें शांतिपूर्ण विधानसभा के आयोजन या सॉलिसिट करने में अपनी भूमिकाओं के कारण इंटरनेट नेटवर्क को ब्लॉक या बंद नहीं कर सकती थीं।

नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्‍ट्रीय नियम (ICCPR)

  • ICCPR नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करने वाली एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधि है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 2200A (XXI) द्वारा इसे 16 दिसंबर, 1966 को हस्ताक्षर, अनुसमर्थन और परिग्रहण के लिये प्रस्तुत किया गया। 23 मार्च, 1976 को यह संधि प्रभावी हुई।
  • भारत सहित कुल 173 देशों ने इस संधि के नियमों की अभिपुष्टि की है।